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हर कहानी कुछ कहती है... पृष्ठ आठ

May 23, 2020
हर कहानी कुछ कहती है..  

स साल वर्माजी का सात वर्षीय बेटा कक्षा दूसरी में आ गया.... कक्षा में हमेशा से अव्वल आता रहा है ! पिछले दिनों तनख्वाह मिली तो वे उसे नयी स्कूल ड्रेस और जूते दिलवाने केलिए बाज़ार ले गये !

बेटे ने जूते लेने से ये कह कर मना कर दिया कि पुराने जूतों को बस थोड़ी-सी मरम्मत की जरुरत है वो अभी भी  इस साल काम आ  सकते हैं! 
अपने जूतों की बजाय उसने अपने दादा की कमजोर हो चुकी नज़र के लिए पिताजी  को नया चश्मा बनवाने को कहा !
वर्माजी को लगा वह अपने दादा से शायद बहुत प्यार करता है इसलिए अपने जूतों की बजाय उनके चश्मे को ज्यादा जरूरी समझ रहा है, उन्होने बेटे को कुछ कहना जरुरी नहीं समझा और उसे लेकर ड्रेस की दुकान पर पहुंचे.....दुकानदार ने बेटे के नाप की सफ़ेद शर्ट निकाली ...पहन कर देखने पर शर्ट एकदम फिट थी.....फिर भी बेटे ने थोड़ी लम्बी शर्ट दिखाने को कहा !!!!

वर्मा जी ने बेटे से कहा : बेटा ये शर्ट तुम्हें बिल्कुल सही है तो फिर और लम्बी क्यों ? बेटे नेकहा :पिता जी मुझे शर्ट निक्कर केअंदर ही डालनी होती है इसलिए थोड़ी लम्बी भी होगी तो कोई फर्क नहीं पड़ेगा.......लेकिन यही शर्ट मुझे अगली क्लास में भी काम आ जाएगी ...... पिछली वाली शर्ट भी अभी नयी जैसी ही पड़ी है लेकिन छोटी होने की वजह से मैं उसे पहन नहीं पा रहा !

वर्मा जी  मौन रहे ! घर आते वक़्त उन्होनें  बेटे से पूछा : तुम्हे ये सब बातें कौन सिखाता है बेटा ?
बेटे नेकहा: पिता जी मैं अक्सर देखता हूँ  कि कभी माँ अपनी साडी छोड़कर तो कभी आप अपने जूतों को
छोडकर हमेशा मेरी किताबों और कपड़ो पर पैसे खर्च कर दिया करते हैं ! गली- मोहल्ले में सब लोग कहते हैं के आप बहुत ईमानदार आदमी हैं और हमारे साथ वाले राजू के पापा को सब लोग, बे-ईमान, रिश्वतखोर और जाने क्या क्या कहते हैं, जबकि आप दोनों एक ही ऑफिस में काम करते हैं.....जब सब लोग आपकी तारीफ करते हैं तो मुझे बड़ा अच्छा लगता है.....मम्मी और दादा जी भी आपकी तारीफ करते हैं ! पिता जी मैं यह बताना चाहता हूं कि मेरी कोई जरूरत इतनी जरुरी और बड़ी नहीं जिसे पूरी करने के लिए कभी जीवन में आपको चोर, बे-ईमान, रिश्वतखोर बनना पड़े, मैं आपकी ताक़त बनना चाहता हूँ पिता जी आपकी कमजोरी नहीं !

बेटे की बात सुनकर वर्मा जी निरूत्तर थे, आज उन्हें पहली बार अपनी ईमानदारी का इनाम मिला था !!
आज बहुत दिनों बाद आँखों में ख़ुशी, गर्व और सम्मान के आंसू थे...


ह कहानी कहती है कि.... हमेँ हमारी आवश्यकताएँ ओर महात्वाकांक्षाएँ ही गलत रास्ते पर जाने के लिए मजबूर करती हैं  यदि हम उनको ही सीमित कर लेँ तो जीवन ईमानदारी से गुजारा जा सकता हैं...  

हर कहानी कुछ कहती हेै...पृष्ठ सात

May 22, 2020

हर कहानी कुछ कहती है ... 

“एक बार एक किसान ने अपने पडोसी को गुस्से में भला बुरा कह दिया, पर जब बाद में उसे अपनी गलती का एहसास हुआ तो वह एक संत के पास गया | उसने संत से अपने शब्द वापस लेने का उपाय पूछा |


संत ने किसान से कहा , ” तुम यहाँ बिखरें हुए सारे पंख इकठ्ठा कर लो , और उन्हें सड़क  के बीचो-बीच जाकर रख दो” किसान ने ऐसा ही किया और फिर संत के पास पहुंच गया|
तब संत ने कहा , ” अब जाओ और उन पंखों को  वापस ले आओ”
किसान वापस गया पर तब तक सारे पंख हवा से इधर-उधर उड़ चुके थे| और किसान खाली हाथ संत के पास पहुंचा| 

तब संत ने उससे कहा कि ठीक ऐसा ही तुम्हारे द्वारा कहे गए शब्दों के साथ होता है, तुम आसानी से इन्हें अपने मुख से निकाल तो सकते हो पर चाह कर भी वापस नहीं ले सकते|

हमारा स्वंय पर नियंत्रण होना चाहिए और हमें यह पता होना चाहिए कि हम क्या बोल रहे है, अन्यथा हमारे पास पछतावे के अलावा कुछ नहीं बचेगा|
ह कहानी कहती है कि... “ अगर हम मीठा और सकारात्मक ही बोलेंगे तो शायद हमको कभी भी यह नहीं सोचना पड़ेगा कि हम क्या बोल रहे है| अगर हमें गुस्सा आता है तो सबसे बेहतर यही होगा कि उस वक्त हम कुछ भी न बोलें क्योंकि उस वक्त हमारी वाणी को हम नहीं बल्कि हमारा क्रोध (Anger)नियंत्रित करता है|”

हर कहानी कुछ कहती हेै...पृष्ठ छ:

May 21, 2020


हर कहानी कुछ कहती है....

दो चींटियाँ थी , एक नमक के ढेर पर बिल बना कर रहती थी, और दूसरी चीनी के ढेर पर बिल बना कर रहती थी ! इसलिए नाम पडा़ sweety और salty!  दोनों में बड़ी मित्रता थी ! दोनों हर दिन एक दूसरे की कुशलक्षेम पूछ कर अपना अपना कार्य करती थी !
एक दिन salty ने sweety से कहा " बहन ना जाने मेरी जुबान को क्या हो गया है हर चीज कड़वी लगाती है मेरी जुबान का तो जैसे स्वाद ही बदल गया है "!
sweety ने हँस कर कहा " बहन तुम हर समय नमक के ढेर पर रहती हो इस कारण हो सकता है तुम्हारी ज़ुबान का स्वाद कड़वा हो गया हो ! इस लिए कुछ दिन मेरे पास आ कर रहो, तुम्हारी ज़ुबान का स्वाद मीठा हो जाएगा"!
salty को यह बात बहुत अच्छी लगी ! वह बोली " सही कह रही हो बहन में कुछ समय तुम्हारे साथ व्यतीत करूंगी शायद सब सही हो जाये" !
कुछ समय पश्चात salty sweety के साथ रहने लगी ! sweety ने उसका भरपूर्वक स्वागत किया ! उसे चीनी भरे मिस्ठान खिलाये ! कुछ दिनों बाद salty बोली "बहन में तुम्हारी आभारी हूँ की तुमने मुझे इतना सम्मान दिया पर लगता है मुझे कोई बीमारी हो गई है ,तुमने मुझे इतने मिस्ठान खिलाये पर ना जाने क्यों अभी भी मेरी जुबान का स्वाद वैसे का वैसा यानि कड़वा ही है "!
sweety ने कुछ देर सोचा फिर मुस्कुरा कर बोली " बहन जरा अपना मुह तो खोलो "salty ने अपना मुह खोला ! Sweety ने देखा की



उसके दांतों में नमक के कई कण लगे हुए है ! उसने उसके सारे दांतों की सफाई की और सब नमक के कणों को साफ़ कर बाहर निकल दिया !फिर उसने उसे चीनी से बने विभिन्न प्रकार के मिस्ठान खिलाये !अब की बार salty को वो मिस्ठान बड़े मीठे और स्वादिस्ट लगे ! उसने भरपूर्वक मिष्ठानों का स्वाद लिया !

ह कहानी कहती है कि... हमें तब तक किसी की अच्छाई नजर नही आ सकती जबतक हमारे मन मेँ उसके प्रति कडवाहट भरी हुई हो अगर जुबान पर कड़वाहट हो तो मीठेपन का स्वाद कैसे आ पायेगा I  इसलिए मिठास पाने के लिए सर्व प्रथम स्वयम का मीठा होना आवश्यक हेै I




हर कहानी कुछ कहती है..पृष्ठ पांच

May 20, 2020

हर कहानी कुछ कहती है....

पढ़ाई पूरी करने के बाद टॉपर छात्र बड़ी कंपनी में इंटरव्यू देने के लिए पहुंचा....
छात्र ने पहला इंटरव्यू पास कर लिया...फाइनल इंटरव्यू डायरेक्टर को लेना था...
डायरेक्टर को ही तयकरना था नौकरी पर रखा जाए या नही।



डायरेक्टर- "क्या तुम्हे पढ़ाई के दौरान कभी स्कॉलरशिप मिली...?"
छात्र- "जी नहीं..."
डायरेक्टर- "इसका मतलब स्कूल की फीस तुम्हारे पिता अदा करते थे.."
छात्र- "हाँ श्रीमान ।"
डायरेक्टर- "तुम्हारे पिता जी काम क्या करते है?"
छात्र- "जी वो लोगों के कपड़े धोते है..."
ये सुनकर डायरेक्टर ने कहा- "ज़रा अपने हाथ दिखाना..."
छात्र के हाथ रेशम की तरह मुलायम और नाज़ुक थे...
डायरेक्टर- "क्या तुमने कभी पिता के कपड़े धोने में मदद की...?"
छात्र- "जी नहीं, मेरे पिता हमेशा यही चाहते रहे है कि मैं स्टडी करूं और ज़्यादा से ज़्यादा किताबें पढ़ूं...हां एक बात और, मेरे पिता मुझसे कहीं ज़्यादा स्पीड से कपड़े धोते है..."
डायरेक्टर- "क्या मैं तुमसे एक काम कह सकता हूं...?"
छात्र- "जी, आदेश कीजिए..."
डायरेक्टर- "आज घर वापस जाने के बाद अपने पिता के हाथ धोना...फिर कल सुबह मुझसे आकर मिलना..."
छात्र ये सुनकर प्रसन्न हो गया...उसे लगा कि जॉब मिलना पक्का है,तभी डायरेक्टर ने कल फिर बुलाया है...
छात्र ने घर आकर खुशी-खुशी पिता को ये बात बताई और अपने हाथ दिखाने को कहा...
पिता को थोड़ी हैरानी हुई...लेकिन फिर भी उसने बेटे की इच्छा का मान करते हुए अपने दोनों हाथ उसके
हाथों में दे दिए...
छात्र ने पिता के हाथ धीरे-धीरे धोना शुरू किया...
साथ ही उसकी आंखों से आंसू भी झर-झर बहने लगे...पिता के हाथ रेगमार की तरह सख्तऔर जगह-जगह से कटे हुए थे...यहां तक कि कटे के निशानों पर जब भी पानी डालता, चुभन का अहसास ता के चेहरे पर साफ़ झलक जाता था...।
छात्र को ज़िंदगी में पहली बार एहसास हुआ कि ये वही हाथ है जो रोज़ लोगों के कपड़े धो-धोकर उसके
लिए अच्छे खाने, कपड़ों और स्कूल की फीस का इंतज़ाम करते थे...
पिता के हाथ का हर छाला सबूत था उसके एकेडमिक करियर की एक-एक कामयाबी का...
पिता के हाथ धोने के बाद छात्र को पता ही नहीं चला कि उसने साथ ही पिता के उस दिन के बचे हुए सारे कपड़े भी एक-एक कर धो डाले... पिता रोकते ही रह गये, लेकिन छात्र अपनी धुन में कपड़े धोता चला गया...



उस रात बाप बेटा ने काफ़ी देर तक बात की... अगली सुबह छात्र फिर जॉब के लिए डायरेक्टर के ऑफिस में था...डायरेक्टर का सामना करते हुए छात्र की आंखें गीली थीं...

डायरेक्टर- "हूं तो फिर कैसा रहा कल घर पर... क्या तुम अपना अनुभव मेरे साथ शेयर करना पसंद करोगे....?"
छात्र- " जी हाँ श्रीमान कल मैंने  जिंदगी का एक वास्तविक अनुभव सीखा...
नंबर एक... मैंने सीखा कि सराहना क्या होती है... मेरे पिता न होते तो मैं पढ़ाई में इतनी आगे नहीं आ सकता था...
नंबर दो... पिता की मदद करने से मुझे पता चला कि किसी काम को करना कितना सख्त और मुश्किल होता है...
नंबर तीन.. . मैंने रिश्ते की अहमियत पहली बार इतनी शिद्धत के साथ महसूस की..."

डायरेक्टर- "यही सब है जो मैं अपने मैनेजर में देखना चाहता हूं...मैं उसे जॉब देना चाहता हूं  जो दूसरों की मदद की कद्र करे, ऐसा व्यक्ति जो काम किए जाने के दौरान दूसरों की तकलीफ भी महसूस करे. ऐसा शख्स जिसने
सिर्फ पैसे को ही जीवन का ध्येय न बना रखा हो... मुबारक हो, तुम इस जॉब के पूरे हक़दार हो...


ह कहानी कहती है कि....आप अपने बच्चों को बड़ा मकान दें, बढ़िया खाना दें, बड़ा टीवी, मोबाइल, कंप्यूटर सब कुछ दें... लेकिन साथ ही बच्चों को प्रत्येक परिस्थिति से  रूबरू कराते रहे ताकि  वो हर चीज की कद्र करे ।



हर कहानी कुछ कहती है...पृष्ठ चार

May 19, 2020




हर कहानी कुछ कहती है...  

एक राजा को उपहार में किसी ने बाज  के दो बच्चे भेंट किये, वे बड़ी ही अच्छी नस्ल के थे ,और राजा ने कभी इससे पहले इतने शानदार बाज नहीं देखे थे। राजा ने उनकी देखभाल के लिए एक अनुभवी आदमी को नियुक्त कर दिया।


 जब कुछ महीने बीत गए तो राजा ने बाजों को देखने का मन बनाया , और उस जगह पहुँच गए जहाँ उन्हें पाला जा रहा था।  राजा ने देखा कि दोनों बाज  काफी बड़े हो चुके थे और अब पहले से  भी ज्यादा शानदार लग रह थेे  ।

 राजा ने देखभाल कर रहे  आदमी से कहा,  मैं इनकी उड़ान देखना चाहता हूँ , तुम इन्हे उड़ने का ईशारा करो ।

“ आदमी ने  ऐसा ही किया।

 ईशारा मिलते ही दोनों बाज  उड़ान भरने लगे , पर जहाँ एक बाज  आसमान की ऊंचाइयों को छू रहा था , वहीँ दूसरा , कुछ ऊपर जाकर वापस उसी डाल पर आकर बैठ  गया जिससे वो उड़ा था।

 ये देख , राजा को कुछ अजीब लगा...

“क्या बात है जहाँ एक बाज  इतनी अच्छी उड़ान भर रहा है वहीँ ये दूसरा बाज उड़ना ही नहीं चाह रहा ?”,
राजा ने सवाल किया।

” जी हुजूर ,इस बाज के साथ शुरू से यही समस्या है , वो इस डाल  को छोड़ता ही नहीं।”

राजा को दोनों ही बाज प्रिय थे , और वो दुसरे बाज  को भी उसी तरह उड़ता देखना चाहते थे।

 अगले दिन पूरे राज्य में ऐलान  करा दिया गया कि जो व्यक्ति इस  बाज को ऊँचा उड़ाने में कामयाब होगा उसे ढेरों ईनाम  दिया जाएगा।

 एक  से एक विद्वान् आये और बाज को उड़ाने का प्रयास करने लगे , पर हफ़्तों बीत जाने के बाद भी बाज
 का वही हाल था, वो थोडा सा उड़ता और वापस डाल पर आकर बैठ जाता।

 फिर एक दिन कुछ अनोखा हुआ , राजा ने देखा कि उसके दोनों बाज आसमान में उड़ रहे हैं। उन्हें अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ और उन्होंने तुरंत उस व्यक्ति का पता लगाने को कहा जिसने ये कारनामा कर
 दिखाया था। वह व्यक्ति एक किसान था।


 अगले दिन वह दरबार में  हाजिर हुआ। उसे ईनाम में स्वर्ण मुद्राएं भेंट करने के बाद राजा ने कहा , ” मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हूँ , बस तुम इतना बताओ कि जो काम बड़े-बड़े विद्वान् नहीं कर पाये वो तुमने कैसे
 कर दिखाया।

“ “मालिक ! मैं तो एक साधारण सा किसान हूँ , मैं ज्ञान की ज्यादा बातें नहीं जानता , मैंने तो बस वो डाल काट दी जिसपर बैठने का बाज आदि हो चुका था,और जब वो डाल ही नहीं रही तो वो भी अपने साथी के साथ ऊपर उड़ने लगा। “

ह कहानी कहती है कि....हम सभी ऊँचा उड़ने के लिए ही बने हैं। लेकिन कई बार हम जो कर रहे होते है उसके इतने आदि हो जाते हैं  कि अपनी ऊँची उड़ान भरने की , कुछ बड़ा करने की काबिलियत को भूला बैठते है,  एक बार ज़रूर सोचिये  कि कहीं हमें भी उस डाल को काटने की ज़रुरत तो नहीं जिस पर बैठने की आदत हो गई है!!!

हर कहानी कुछ कहती है...पृष्ठ तीन

May 18, 2020




हर कहानी  कुछ कहती है....


 एक चिड़िया का एक अन्न कण पेड़ के कंदरे में कहीं फंस गया था...
चिड़िया ने पेड़ से बहुत अनुरोध किया उस दाने को दे देने के लिए लेकिन पेड़ उस छोटी सी चिड़िया की बात भला कहां सुनने वाला था...


परेशान होकर चिड़िया बढ़ई के पास गई और उसने उससे अनुरोध किया कि तुम उस पेड़ को काट दो, क्योंकि वो उसका दाना नहीं दे रहा...

भला एक दाने के लिए बढ़ई पेड़ कहां काटने वाला था... फिर चिड़िया राजा के पास गई और उसने राजा से कहा कि तुम बढ़ई को सजा दो क्योंकि-
 बढ़ई पेड़ नहीं काट रहा और
 पेड़ दाना नहीं दे रहा...

राजा ने उस नन्हीं चिड़िया को डांट कर भगा दिया कि कहां एक दाने के लिए वो उस तक पहुंच गई है।
चिड़िया हार नहीं मानने वाली थी...

वो महावत के पास गई कि अगली बार राजा जब हाथी की पीठ पर बैठेगा तो तुम उसे गिरा देना, क्योंकि
 राजा बढ़ई को सजा नहीं देता...
बढ़ई पेड़ नहीं काटता...
पेड़ उसका दाना नहीं देता...
महावत ने भी चिड़िया को डपट कर भगा दिया...

चिड़िया फिर हाथी के पास गई और उसने अपने अनुरोध को दुहराया कि अगली बार जब महावत तुम्हारी पीठ पर बैठे तो तुम उसे गिरा देना क्योंकि

 वो राजा को गिराने को तैयार नहीं...
राजा बढ़ई को सजा देने को तैयार नहीं...
बढ़ई पेड़ काटने को तैयार नहीं...
पेड़ दाना देने को तैयार नहीं।

हाथी बिगड़ गया...उसने कहा, ऐ छोटी चिड़िया..तू इतनी सी बात के लिए महावत और राजा को गिराने की बात सोच भी कैसे रही है?

चिड़िया आखिर में चींटी के पास गई और वही अनुरोध दोहराकर कहा कि तुम हाथी की सूंढ़ में घुस जाओ...
चींटी ने चिड़िया से कहा, "चल भाग यहां से...बड़ी आई हाथी की सूंढ़ में घुसने को बोलने वाली।

अब तक अनुरोध की मुद्रा में रही चिड़िया ने रौद्र रूप धारण कर लिया...उसने कहा कि "मैं चाहे पेड़, बढ़ई, राजा, महावत, और हाथी का कुछ न बिगाड़ पाऊं...पर तुझे तो अपनी चोंच में डाल कर खा ही सकती हूँ...

चींटी डर गई...भाग कर वो हाथी के पास गई...हाथी डरा,भागता हुआ महावत के पास पहुंचा...महावत डरकर भागता हुआ  राजा के पास पहुंचा और बोला -- कि हुजूर चिड़िया का काम कर दीजिए नहीं तो मैं आपको  गिरा दूंगा....राजा ने फौरन बढ़ई को बुलाया...उससे कहा कि पेड़ काट दो नहीं तो सजा दूंगा...बढ़ई पेड़ के पास पहुंचा...बढ़ई को देखते ही पेड़ बिलबिला उठा कि मुझे मत काटो…मैं चिड़िया को दाना लौटा दूंगा...



ह कहानी कहती है कि....
आपको अपनी ताकत को पहचानना होगा...आपको पहचानना होगा कि भले आप छोटी सी चिड़िया की तरह होंगे, लेकिन ताकत की कड़ियां कहीं न कहीं आपसे होकर गुजरती होंगी... हर शेर को सवा सेर मिलता है, बशर्ते आप अपनी लड़ाई से घबराएं नहीं...आप अगर किसी काम के पीछे पड़ जाएंगे तो वो काम होकर रहेगा... यकीन कीजिए...हर ताकत के आगे एक और ताकत होती है और अंत में सबसे ताकतवर आप होते हैं...                                                हिम्मत, लगन और पक्का इरादा ही हमारी ताकत की बुनियाद है..।

हर कहानी कुछ कहती है...पृष्ठ दो

May 18, 2020
हर कहानी  कुछ कहती है....




वो एक बर्फ बनाने की विशाल फैक्ट्री थी!  वहां हजारों टन बर्फ बनता था ! सैकड़ों मजदूर, कर्मचारी एवं अधिकारी वहां  काम करते थे ! उन्ही में से  एक कर्मचारी था अखिलेश ! अखिलेश उस फैक्ट्री में पिछले बीस सालों से काम कर रहा था ! उसके मृदु व्यहार, ईमानदारी,एवं काम के प्रति समर्पित भावना के कारण वो उन्नति करते करते सुपरवाइजर के पद पर पहुँच गया था ! उसको फैक्ट्री के हर काम की जानकारी थी ! जब भी कोई मुश्किल होती सब, यहाँ तक की फैक्ट्री के मालिक भी उसी को याद करते थे और वह उस मुश्किल पलों को चुटकियों में हल कर देता था ! इसलिए फैक्ट्री में सभी लोग ,कर्मचारी और अधिकारी उसका बहुत मान करते थे ! इन सब के अलावा उसकी एक छोटी सी अच्छी आदत थी वह जब भी फैक्ट्री में प्रवेश करता फैक्ट्री के गेट पर तैनात सुरक्षा गार्ड से ले कर सभी अधिनिस्त कर्मचारियों से मुस्कुरा कर बात करता उनकी कुशलक्षेम पूछता और फिर अपने कक्ष में जा कर अपने काम में लग जाता , वैसा ही वह घर जाते समय करता था !
एक दिन फैक्ट्री के मालिक ने अखिलेश को बुला कर कहा " अखिलेश एक आइसक्रीम की बहुराष्ट्रीय कम्पनी ने हमें एक बहुत बड़ा आर्डर दिया है और हमें इस आर्डर को हर हाल में नीयत तिथि तक पूरा करना है ताकि कंपनी की साख और लाभ दोनों में बढ़ोत्तरी हो तथा और नई कंपनियां हमारी कंपनी से जुड़ सके ! इस काम को पूरा करने के लिए तुम कुछ भी कर सकते हो चाहे कर्मचारियों को ओवरटाइम दो बोनस दो या और नई भर्ती करो पर आर्डर समय पर पूरा कर पार्टी को भिजवाओ "अखिलेश ने कहा ठीक है में इस आर्डर को समय पर पूरा कर दूंगा ! मालिक ने मुस्कुरा कर अखिलेश से कहा "मुझे तुमसे इसी उत्तर की आशा थी" अखिलेश ने सभी मजदूरों को एकत्रित किया और आर्डर मिलाने की बात कही और कहा "मित्रो हमें हर हाल में ये आर्डर पूरा करना है इसके लिए सभी कर्मचारियों को ओवरटाइम, बोनस सभी कुछ मिलेगा साथ ही ये कंपनी की साख का भी सवाल है "!एक तो कर्मचारियों का अखिलेश के प्रति सम्मान की भावना तथा दूसरी और ओवरटाइम व बोनस मिलाने की ख़ुशी ,सभी कर्मचरियों ने हां कर दी ! फैक्ट्री में दिन रात युद्धस्तर पर काम चालू हो गया !अखिलेश स्वयं भी सभी कर्मचारियों का होसला बढ़ाता हुआ उनके कंधे से कन्धा मिला कर काम कर रहा था ! उन सभी की मेहनत रंग लाई और समस्त कार्य नीयत तिथि से पूर्व ही समाप्त हो गया ! बर्फ शीतलीकरण (कोल्ड स्टोरेज) कक्ष जो एक विशाल अत्याधुनिक तकनीक से बना हुआ तथा कम्प्यूटराइज्ड था , में पेक कर के जमा कर दी गई ! सभी कर्मचारी काम से थक गए थे इस लिए उस रोज काम बंद कर सभी कर्मचारियों की छुट्टी कर दी गई सभी कर्मचारी अपने अपने घर की तरफ प्रस्थान कर गए ! अखिलेश ने सभी कार्य की जांच की और वह भी घर जाने की तैयारी करने लगा, जाते जाते उसने सोचा चलो एक बार शीतलीकरण कक्ष की भी जाँच कर ली जाये की सारी की सारी बर्फ पैक्ड और सही है की नहीं ,यह सोच वो शीतलीकरण कक्ष को खोल कर उसमे प्रवेश कर गया ! उसने घूम फिर कर सब चेक किया और सभी कुछ सही पा कर वह जाने को वापस मुडा ! पर किसी तकनीकी खराबी के कारण शीतलीकरण कक्ष का दरवाजा स्वतः ही बंद हो गया ! दरवाजा ऑटोमेटिक था तथा बाहर से ही खुलता था इस लिए उसने दरवाजे को जोर जोर से थपथपाया पर सभी कर्मचारी जा चुके थे उसकी थपथपाहट का कोई असर नहीं हुआ उसने दरवाजा खोलने की बहुत कोशिश की पर सब कुछ बेकार रहा  !अखिलेश घबरा गया उसने और जोर से दरवाजे को पीटा जोर से चिल्लाया पर कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई !


 अखिलेश सोचने लगा की कुछ ही घंटों में शीतलीकरण कक्ष का  तापमान शून्य से भी कम हो जायेगा ऐसी दशा में मेरा खून का जमना निश्चित है ! उसे अपनी मौत नजदीक दिखाई देने लगी !उसने एक बार पुनः दरवाजा खोलने की कोशिश की पर सब कुछ व्यर्थ रहा !कक्ष का तापमान धीरे धीरे कम होता जा रहा था ! अखिलेश का शरीर अकड़ने लगा ! वो जोर जोर से अपने आप को गर्म रखने के लिए भाग दौड़ करने लगा !  आखिर थक कर एक स्थान पर बैठ गया ! तापमान शुन्य डिग्री की तरफ बढ़ रहा था ! अखिलेश की चेतना शुन्य होने लगी ! उसने अपने आप को जाग्रत रखने की बहुत कोशिश की पर सब निष्फल रहा ! तापमान के कम होने पर अखिलेश भावना शुन्य होने लगा और अचेत हो कर वही ज़मीन पर गिर पड़ा ! कुछ ही समय पश्चात दरवाजा धीरे से खुला !

 एक साया अंदर आया उसने अचेत अखिलेश को उठाया और शीतलीकरण कक्ष से बाहर ला कर लिटाया उसे गर्म कम्बल से ढंका और पास ही पड़ा फैक्ट्री के कबाड़ को एकत्रित कर उसमे आग जलाई ताकि अखिलेश को गर्मी मिल सके और उसका रक्तसंचार सुचारू हो सके ! गर्मी पाकर अखिलेश के शरीर में कुछ शक्ति आई उसका रक्तसंचार सही होने लगा ! आधे घंटे के बाद अखिलेश के शरीर में हरकत होने लगी उसका रक्तसंचार सही हुआ और उसने अपनी आँखे खोली !उसने सामने गेट पर पहरा देने वाले सुरक्षा गार्ड शेखर को पाया !उसने शेखर से पुछा मुझे बाहर किसने निकला और तुम तो  गेट पर रहते हो तुम्हारा तो फैक्ट्री के अंदर कोई कार्य भी नहीं फिर तुम यहाँ कैसे आये ?शेखर ने कहा 

"सर में एक मामूली सा सुरक्षा गार्ड हूँ ! फैक्ट्री में प्रवेश करने वाले प्रत्येक पर निगाहे रखना तथा सभी कर्नचारियों व अधिकारियो को सेल्यूट करना  मेरी ड्यूटी है ! मेरे अभिवादन पर अधिकतर कोई ध्यान नहीं देता कभी कभी कोई मुस्कुरा कर अपनो गर्दन हिला देता है !पर सर एक आप ही ऐसे इंसान है जो प्रतिदिन मेरे अभिवादन पर मुस्कुरा कर अभिवादन का उत्तर देते थे साथ ही मेरी कुशलक्षेम भी पूछते थे ! आज सुबह भी मेने आपको अभिवादन किया आपने मुस्कुरा कर मेरे अभिवादन का उत्तर दिया और मेरे हालचाल पूछे! मुझे मालूम था की इन दिनों फैक्ट्री में बहुत काम चल रहा है जो आज समाप्त हो जायेगा ! और काम समाप्त भी हो गया सभी लोग अपने अपने घर जाने लगे ! जब सब लोग दरवाजे से निकल गए तो मुझे आप की याद आई की रोज आप मेरे से बात कर के घर जाते थे पर आज  दिखाई नहीं दिए ! मेने सोचा शायद अंदर काम में लगे होंगे ! पर सब के जाने के बाद भी बहुत देर तक आप बाहर आते दिखाई नहीं दिए तो मेरे दिल में कुछ शंकाएं उत्पन्न होने लगी !क्यों किि फैक्ट्री के जाने आने का यही एकमात्र रास्ता है इसी लिए में आपको ढूंढते हुए फैक्ट्री के अंदर आ गया !मेने आपका कक्ष देखा मीटिंग हाल देखा बॉस का कक्ष देखा पर आप कही दिखाई नहीं दिए !मेरा मन शंका से भर गया की आप कहाँ गए ?कोई निकलने का दूसर रास्ता भी नहीं है ! मैं वापस जाने लगा तो सोचा चलो शीतलीकरण कक्ष भी देख लू ! पर वो बंद था ! मैं वापस जाने को मुड़ा पर मेरे दिल ने कहा की एक बार इस शीतलीकरण कक्ष को खोल कर भी देखूं ! मैंने आपातकालीन चाबियाँ जो मेरे पास रहती है ,से कक्ष खोला तो आपको यहाँ बेहोश पाया !
अखिलेश एक टक शेखर के चहरे की और देखे जा रहा था उसने सपने में भी नहीं सोचा था की उसकी एक छोटी सी अच्छी आदत का प्रतिफल उसे इतना बड़ा मिलेगा !उसकी आँखों में आंसू आ गये उसने उठ कर शेखर को गले लगा लिया
ह कहानी कहती है कि....इक अच्छी आदत चाहे वह छोटी सी ही क्यों ना हो अपने जीवन में बड़ी सहायक बन जाती हैI

हर कहानी कुछ कहती है...पृष्ठ एक

May 16, 2020

हर कहानी कुछ कहती है...



क व्यक्ति अपने बगीचे को संवारने में व्यस्त था..तभी वहां रखी तस्तरी में उसने तितली के अंडे देखे..वह बहुत उत्साहित हुआ और रोज उनको विकसित होते देखने लगा..एक दिन एक अंडे में हलचल हुई वह अपनी ऑखों से नई जिन्दगी को आते देखने की लालसा में अब घंटो बगीचे में बैठा रहता..दिन प्रति दिन उस अंडे में हो रहे विकास की प्रक्रिया में अब उसमे दरारे आ गई..फिर वह दिन आया जब उसमें से एक छोटा सा सर धीरे-धीरे बाहर निकलता दिखाई दिया..यह देख उस व्यक्ति की उत्सुकता चरम पर थी..वह दौड़ कर अपने सूक्ष्मदर्शी यंत्र लाया ताकि पल-पल उस नन्हे की जन्मयात्रा देख पाए तब उसने देखा कि अंडे से बाहर आने के लिए वह नन्हा कितना संघर्ष कर रहा है...

दया भावना और सहायता करने के उद्देश्य से वह एक सूई लेकर अंडे में छेद करने लगा...जब वह नन्ही तितली पूरी तरह से अंडे से बाहर आई तो वह व्यक्ति बहुत खुश हुआ...अब उसे उस दिन का इंतजार था जब ये तितली परिपक्व होकर उड़ेगी...परन्तु एेसा नहीं हुआ..उस नन्ही का सर सामान्य से कुछ ज्यादा बड़ा होने के कारण वह उस तस्तरी में ही चिल्लाते हुए चार सप्ताह में मर गयी....वह व्यक्ति दु:खी मन से अपने एक जानकार मित्र के पास वजह जानने पहुचां....उसके मित्र ने बताया की अंडे से बाहर आने का जो संघर्ष है वही इनके सटीक रक्त संचार और सेहतमंद होने की प्रक्रिया है िजससे इनका पूर्ण विकास होता है...यह जानकर वह व्यक्ति ग्लानी से भर गया..

ह कहानी कहती है कि...संघर्ष... हमेशा जीवन की किठनाईयों से सामना करना सीखाता है, संघर्ष सम्पूर्ण व्यक्तित्व का विकास करने में सहायक होता है...माता पिता होने के नाते अपने बच्चों के साथ हम कुछ ऐसा ही व्यवहार करते है....हम यह नहीं चाहते की बच्चों को किसी भी प्रकार की परेशानी हो...परन्तु हमारा कर्तव्य है कि हम उन्हे सिखाए कि सड़क पर कैसे चलना है.. हमें उनके लिए सड़क का निर्माण करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.... जय महाकाल